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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 91 (90 في الأجبية) - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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المزمور السابق لهذا المزمور مكتوب عنه أنه لموسى النبي، لذلك قال كثير من الدارسين أن هذا المزمور أيضًا لموسى النبي. وقال الآخرين بل هو لداود.

هذا المزمور نرى فيه عناية الله وحمايته لأولاده المؤمنين به. وقيل أن كلمات هذا المزمور موجهة للسيد المسيح نفسه في آلامه، خصوصًا أن إبليس في تجربته للسيد استخدم آية من هذا المزمور "لأنه يوصي ملائكته بك.." وإبليس لم يكمل المزمور لأن فيه نبوة ضده وهذا ما صنعه السيد المسيح إذ داسه فعلًا بقدميه "تطأ الأفعى وملك الحيات، وتسحق الأسد والتنين". ونصلي هذا المزمور في الساعة السادسة لنذكر أنه مع أن السيد معلق على الصليب إلا أنه سينتصر ويدوس إبليس الحية القديمة.

عمومًا نرى في هذا المزمور انتصار المسيح على إبليس ومؤامراته، وإبليس كُنِّيَ عنه هنا بعدة أسماء، فهو الصياد الذي يضع فخًا في طريق المؤمنين، ويأتي بالوبأ الخطر بل هو نفسه الوبأ الخطر (هو نوع من الموت المبيد) وهو سهم يطير في النهار وهو خوف الليل وهلاك يفسد في الظهيرة وهو الأسد والصل والشبل والثعبان ولكنه مع كل هذا قد داسه السيد لحساب شعبه فقيل هنا يسقط عن جانبك ألوف وربوات (لو19:10). هو مزمور يعطي لكل منا اطمئنان وينزع كل خوف من أي مؤامرة شيطانية، أن الله سيعطي نصرة لنا ولكنيسته.. كثيرين يصلون هذا المزمور دائمًا وليس في الساعة السادسة فقط.

 

آية (1): "الساكن في ستر العلي في ظل القدير يبيت."

من يسلم نفسه لله يحفظه من كل ضرر، ومن كل مؤامرة شيطانية، أو هجوم لأي عدو.

 

آية (2): "أقول للرب ملجأي وحصني إلهي فأتكل عليه."

الله لنا سور من نار (زك5:2). هو لنا مدينة ملجأ. فلا نثق في قوتنا بل فيه.

 

آية (3): "لأنه ينجيك من فخ الصياد ومن الوبأ الخطر."

الوبأ الخطر= مترجمة كلام باطل. فإبليس أوقع آبائنا آدم وحواء بكلامه المميت فألاعيب إبليس وكلامه المضل يسقطنا في الانفصال عن الله وهذا هو الموت. وهكذا كل تعاليم الهراطقة، هي فخ صياد ونوع من الموت المبيد. الفخ عادة يوضع بحيث يكون مخفيًا عن عين الفريسة ولكن لنثق فالله لا يخفي عليه شيء. ولكن لنثبت في الله والله فينا فيكشف لنا عن الفخاخ المنصوبة (هرطقات، تشويه لتعليم الله/ خطايا وشهوات/ شكوك).

 

آية (4): "بخوافيه يظللك وتحت أجنحته تحتمي. ترس ومجن حقه."

هذا ما قاله موسى النبي في (تث11:32). خَوَافِيهِ= ريش الأجنحة. تُرْسٌ وَمِجَنٌّ حَقُّهُ = "عدله يحيط بك كالسلاح" (سبعينية). هذا هو الصليب الذي يحمينا. وهذه تعني أيضًا أنه إن إلتزمنا بأن نسلك في وصاياه فهو يحمينا= كتُرْسٌ وَمِجَنٌّ = وهو يعطي المعونة لكي نسلك في طريق الحق، لذلك قال السيد المسيح في صلاته الشفاعية للآب (يو17: 17) "قدسهم في حقك كلامك هو حق" وقدسهم أي خصصهم ليسلكوا في الحق، وإحمهم من حرب إبليس فلا يضلوا.

تُرْسٌ وَمِجَنٌّ حَقُّهُ = His truth shall be your shield and buckler من يلتزم بالسلوك بالحق (وصايا الله) = حقه، فالله يكون له معين وحماية = ترسٌ ومجن. إذاً ضع فى قلبك أن تلتزم بالوصية التى هى حق، والله سيحميك من شراك العدو الذى سيحاول أن يغريك لتحيد عن طريق الحق.

 

الآيات (5-8): "لا تخشى من خوف الليل ولا من سهم يطير في النهار. ولا من وباءٍ يسلك في الدجى ولا من هلاك يفسد في الظهيرة. يسقط عن جانبك ألف وربوات عن يمينك. إليك لا يقرب. إنما بعينيك تنظر وترى مجازاة الأشرار."

هنا نرى المناعة ضد الأخطار المذكورة. وهنا يذكر المرتل عناية الله بشعبه في مصر ونجاتهم من كل مؤامرات واضطهادات فرعون (رمز لإبليس) ونجاتهم من الضربات التي لحقت بالمصريين. خوف الليل= الخيانة المجهولة. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). سهم يطير في النهار= المقاومة الظاهرة. وباء يسلك في الدجي= القوات الشريرة المضادة. هلاك يفسد في الظهيرة= تراخي الإنسان واستسلامه للشبع واللذات وشهوة الجسد. ومن يحتمي بالله يسقط كل مقاوميه عن يساره وعن يمينه، فهناك ضربات يسارية (شهوات وخطايا) وهناك ضربات يمينية (بر ذاتي).

 

الآيات (9، 10): "لأنك قلت أنت يا رب ملجأي. جعلت العَلي مسكنك. لا يلاقيك شر ولا تدنو ضربة من خيمتك."

لأَنَّكَ قُلْتَ أَنْتَ يَا رَبُّ مَلْجَإِي = متى يحمينا الله؟ حينما نثق فيه ونتكل عليه كملجأ لنا.

جَعَلْتَ الْعَلِيَّ مَسْكَنَكَ = إن من يسكن حصناً يكون مطمئناً، فكم وكم من يجعل العلي مسكنه. لاَ يُلاَقِيكَ شَرٌّ = قد تصادفنا تجارب (أيوب مثلاً) ولكنها للخير وليست الشر.

 

الآيات (11، 12): "لأنه يوصي ملائكته بك لكي يحفظوك في كل طرقك. على الأيدي يحملونك لئلا تصدم بحجر رجلك."

نرى هنا حراسة الملائكة لنا (عب14:1). وحاول إبليس بهذه الآية أن يستدرج مخلصنا لفخ الكبرياء فيطرح نفسه من جناح الهيكل إلى أسفل. ورد عليه المخلص "لا تجرب الرب إلهك". وعموماً فالمسيح لا يحتاج لمعونة الملائكة فهو ربهم، ولكن هذه الآية مفيدة للقديسين، هؤلاء يحتاجون لحماية الملائكة.

 

آية (13): "على الأسد والصل تطأ. الشبل والثعبان تدوس."

هي (لو19:10). فالأسد هو الشيطان في قوته والثعبان هو الشيطان في مكره وخبثه. وراجع (أف12:6). وكيف ندوسه [1] بالتواضع [2] ضبط النفس [3] التعفف.. هذا هو جهادنا. ولكننا ندوسه بقوة المسيح ونعمته حينما يكون لنا جهاد (عب4:12).

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