St-Takla.org  >   pub_Bible-Interpretations  >   Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament  >   Father-Antonious-Fekry  >   21-Sefr-El-Mazameer
 

شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القس أنطونيوس فكري

مزمور 20 (19 في الأجبية) - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
تفسير سفر مزمور: فهرس المزامير بالرقم | فهرس المزامير حسب الأجبية | مقدمة للبابا شنودة | مقدمة سفر المزامير | مزامير الأجبية | مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 (قطعة: أ - ب - ج - د - هـ - و - ز - ح - ط - ي - ك - ل - م - ن - س - ع - ف - ص - ق - ر - ش - ت) | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | ملخص عام لسفر المزامير

نص سفر مزمور: مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | المزامير كامل

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح

← اذهب مباشرةً لتفسير الآية: 1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7 - 8 - 9

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

نظم داود هذا المزمور عند حربه مع بني عمون وأرام الذين جاءوا بعدد عظيم من الخيل والمركبات لمحاربته (2صم6:10، 8 + 1أي7:19). ولقد نصر الله داود، ودائمًا ينصر الله عبيده الأمناء فهذا حدث مع حزقيا عند حصار أشور لأورشليم. فمن يتكل على الله لا يكون لفرسان الأعداء وقوتهم أي قدرة على إلحاق الأذى به.

        ·            ويرى عدد من آباء اليهود أن هذا المزمور خاص بالمسيا. وهكذا رأى عدد من أباء الكنيسة (أثناسيوس وأغسطينوس) أنه نبوة عن آلام المسيح وانتصاره وانتصار الكنيسة فيه.

        ·            بل كل مؤمن يرتل هذا المزمور على أنه الملك الذي سينصره الله "جعلنا ملوكًا وكهنة" (رؤ6:1) فمن يختار المسيح يختار الطريق الضيق، طريق الشدة ولكن الله ينصره ويستجيب له.

 

آية (1): "ليستجيب لك الرب في يوم الضيق. ليرفعك اسم إله يعقوب."

الله استجاب لداود في يوم شدته، وهكذا يستجيب لكل من يصرخ إليه. ولنفهم أن حياتنا على الأرض هي حرب متصلة، أعدائنا محيطين بنا (الشياطين) ولكن الله معنا. ويوم الضيق بالنسبة لنا هو حياتنا في هذا العالم، في كل تجربة وكل شدة. ويوم الضيق بالنسبة للمسيح كان يوم الصليب. ونحن في حياتنا الآن نشترك مع المسيح في صليبه. وذكره ليعقوب فهو أبو الشعب كله والذي صارع مع الله. والله استجاب ليعقوب يوم شدته. وبذلك نذكر أهمية الجهاد مع الله.

 

آية (2): "ليرسل لك عونًا من قدسه ومن صهيون ليعضدك."

من قُدسهِ = تابوت العهد أو الخيمة في العهد القديم. والآن فالمسيح جالس عن يمين الآب ليعين كنيسته، بل هو ساكن فينا ونحن هيكله، يستجيب كل من يدعوه. وهو ساكن في كنيسته = صهيون= وهنا نرى أهمية صلاة الكنيسة عن الفرد، الكنيسة صلاتها فعالة (أع5:12).

 

آية (3): "ليذكر كل تقدماتك ويستسمن محرقاتك. سلاه."

يَذْكُرْ جميعَ ذبائحك = المرتل يقصد بالمعني المباشر، الذبائح التي كانت تقدم قبل المعركة لينصرهم الله. فالمصالحة مع الله غير ممكنة بدون دم. وذبيحتنا المقبولة التي يذكرها الله دائماً فنصير مقبولين هي ذبيحة المسيح. وَيَسْتَسْمِنْ مُحْرَقَاتِكَ = فالله قبل ذبيحة المسيح.

وعلى كل منا أن يقدم ذبائح ليقبلها الله (العبادة والتسبيح والنفس المنسحقة،..). ومن هو في المسيح يكون كل ما يقدمه مقبولا عند الله ويبارك الله فيه ويقبله. فإن صلَّى يبارك الله في صلاته ويعلمه كيف تكون صلاته مقبولة ثم يقبل ما سيقدمه وتكون صلاته كأنها محرقة ذات رائحة لذيذة يفرح بها الله كأنها ذبيحة كبيرة = يستسمن . ويعطيه الله قلباً نقياً يطلب طلبات نقية ثم يستجيب الله ويعطيه حسب قلبه النقي.

 

آية (4): "ليعطِك حسب قلبك ويتمم كل رأيك."

ليعطِك حسب قلبك= شهوة قلب المسيح كانت خلاص البشر. وكانت إرادة قلب داود أن ينتصر وأعطاه الله سؤل قلبه، فإن كان طلب كل منا الخلاص بقلبه لنلناه. وكل من يسلك حسب إرادة الله يعطيه الله طلبة قلبه. ويستسمن محرقاته.

أما ذوو القلب الشرير سيعطيهم الله أيضًا حسب قلوبهم، ولما اشتهى بنو إسرائيل أن يكون لهم ملكًا يفتخرون به أمام الأمم أعطاهم الله شاول أطول وأعرض من في الشعب. وفي نهاية الأيام سيسمح الله بظهور ضد المسيح فهذا سيكون بحسب قلب البشر.

 

آية (5): "نترنم بخلاصك وباسم إلهنا نرفع رايتنا ليكمل الرب كل سؤلك."

نترنم = المرنم يسبح الله على معونته التي بها خلَّصه. هنا اعتراف بخلاص الله لأنه خلَّص مسيحه داود وأقام المسيح ليقيمنا ويستجيب دائمًا لطلباتنا. فمن يسير وراء المسيح دائمًا يسبحه إذ يرى أعمال خلاصه، حقًا الطريق ضيق لكنه مفرح لذلك فعبيد الله يسبحونه على كل الفرح الذي يعطيه لهم. ومن يثبت نظره على الله لن ينشغل بعطاياه بل ينشغل به هو فيسبحه ويعترف بعمله العجيب. باسم إلهنا نرفع رايتنا "ننمو" (سبعينية). الرايات هي رايات النصرة بالمسيح الغالب. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). ولأن القيامة يتبعها نمو مستمر، فالمسيحي في طريق خلاصه يمارس التوبة وينمو كل يوم، نموًا في محبة الله ومحبة الآخرين والقداسة والصلاة.. كل هذا باسم الله. ورفع الراية هو علامة النصرة علي عدو الخير.

لِيُكَمِّلِ الرَّبُّ كُلَّ سُؤْلِكَ = هنا نرى أنه حينما عاد داود بالشكر لله على إنتصاره = نترنم .. نرفع رايتنا، يزيده الله نعمة بأن يستجيب لبقية طلباته. وكتطبيق لهذا راجع قصة العشرة البرص (لو17: 12)، وكيف أن من عاد بالشكر على شفائه الجسدى زاده الله نعمة الخلاص الروحى.

 

آية (6): "الآن عرفت أن الرب مخلص مسيحه يستجيبه من سماء قدسه بجبروت خلاص يمينه."

داود حينما نصره الله يعترف هنا بأن النصرة كانت من عند الله ولذلك يسبحه. وخلاص المسيح كان بقيامته. وخلاصنا هو بقيامته وتوبتنا المستمرة لنثبت فيه. وندرك قوة القيامة في حياتنا إذ نرى بل يرى الناس التغيير الذي يحدث في حياتنا بالتوبة والرجوع لله.

 

الآيات (7-9): "هؤلاء بالمركبات وهؤلاء بالخيل. أما نحن فاسم الرب إلهنا نذكر. هم جثوا وسقطوا أما نحن فقمنا وانتصبنا."

سلاح الأعداء قوي ولكن الله هو سلاحنا به نغلب ولا نسقط أبدًا. وهنا نرى خلاص الكنيسة كلها ونصرتها في مسيحها المنتصر. وقارن آية 7 مع قول داود لجلياط "أنت تأتى إلىَّ بسيف ورمح، وأنا آتى إليك بإسم رب الجنود" (1صم17: 45). فنرى أن هذا هو فكر داود ولم يتغير.

 

وهذا المزمور نصليه في الساعة الثالثة فالمسيح كان في ضيقته قد تخلى عنه الجميع ولكنه انتصر.

St-Takla.org                     Divider فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

← تفاسير أصحاحات مزامير: مقدمة | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | 64 | 65 | 66 | 67 | 68 | 69 | 70 | 71 | 72 | 73 | 74 | 75 | 76 | 77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85 | 86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | 108 | 109 | 110 | 111 | 112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | 121 | 122 | 123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149 | 150 | 151

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح


© st-takla.org موقع الأنبا تكلا هيمانوت: بوابة عامة عن عقيدة الكنيسة القبطية الأرثوذكسية، مصر / إيميل:

الكتاب المقدس: بحث، تفاسير | القراءات اليومية | الأجبية | أسئلة | طقس | عقيدة | تاريخ | كتب | شخصيات | كنائس | أديرة | كلمات ترانيم | ميديا | صور | مواقع | اتصل بنا

https://st-takla.org/pub_Bible-Interpretations/Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament/Father-Antonious-Fekry/21-Sefr-El-Mazameer/Tafseer-Sefr-El-Mazamir__01-Chapter-020.html