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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 93 (92 في الأجبية) - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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الترجمة السبعينية تشير أن داود هو كاتب هذا المزمور.

هذا المزمور يضع أمامنا كرامة وعظمة مملكة الله، ورعب أعدائه وتعزية المؤمنين به. والله هو ملك العالم كله، سواء المؤمنين أو غير المؤمنين، من يعرفوه أو من ينكروا وجوده أو حتى الوثنيين، هو يشرق شمسه على الأبرار والأشرار، الله هو الذي خلق المسكونة وثبتها. ولكننا نسمع هنا الرب قد ملك= وحرفيًا قد صار ملكًا وفي هذا إشارة لأن المسيح ملك على كنيسته وعلى قلوب شعبه بصليبه. لذلك فهذا المزمور يحدثنا عن ملك الله على العالم كله، ثم ملكه على كنيسته، يقدسها ويحفظها وملك المملكتين دُفِعَ إلى المسيح.

ونصلي هذا المزمور في الساعة السادسة التي صُلِبَ فيها المسيح فبصليبه ملك علينا. ولبس الجلال وسحق الشيطان وكل جنوده. هذا المزمور لا يتكلم عن الآلام التي لحقت برب المجد ولكنه يتكلم عن الأمجاد خصوصًا بعد القيامة.

 

آية (1): "الرب قد ملك. لبس الجلال. لبس الرب القدرة. ائتزر بها. أيضًا تثبتت المسكونة لا تتزعزع."

الرب قد ملك= قبل الصليب كان الشيطان قد استعبد البشر، وبعد الصليب استرد المسيح شعبه واشتراه بدمه ليحررهم من إبليس ويملك هو عليهم. وهذا غير ملكه الأزلي على كل العالم. لبس الجلال. لبس القدرة= حين أظهر قوته في خلاص أتباعه، تحقق الكل أنه ملك. والجلال الذي لبسه هو جسده الممجد الذي قام به من الأموات ثم صعد به إلى السموات ليجلس به عن يمين الآب. لقد ظهر الآن قوة لاهوته في جسده بعد أن كان قد أخلى ذاته آخذًا صورة عبد. وثبت كنيسته حتى لا تتزعزع= تثبتت المسكونة= بعد أن انتشرت الكنيسة في كل المسكونة. وكانت المسكونة أي كل بني آدم مضطربين كالعميان يتخبطون في الضلال الذي زرعه إبليس فثبت المسيح كنيسته على صخرة الإيمان به، ولن تقدر أبواب الجحيم أن تزعزعها. الله أعطى آدم جسدًا له جلال وبهاء، ولكنه بالخطية تعرى وفقد جلاله، فجاء المسيح وأخذ جسده من آدم ليتعرى هو ثم يلبس الجلال، ليلبسنا نحن إياه بعد أن فقدناه. ولم يلبس فقط جسدًا ممجدًا بل قدير قادرًا على أن يرعب أعدائه.

 

آية (2): "كرسيك مثبتة منذ القدم. منذ الأزل أنت."

كرسيك مثبتة منذ القدم. منذ الأزل أنت= هذا الكلام موجه لمن قيل له في آية (1) أنه صار ملكًا، فمع أنه تنازل وأخلى ذاته أخذًا صورة عبد، لكنه هو يهوه، الله الذي كرسيه= عرشه ثابت من قبل تجسده وهو أزلي لا بداية له، وأيضًا أبدي. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). وهذه الآية نفسها تقريبًا في (مز6:45 + عب8:1 وبنفس المفهوم 1يو1:1، 2) ونصلي بهذه الآية في الساعة الثانية عشرة من يوم الجمعة العظيمة، ساعة دفن المسيح لنذكر أنه هو الله الأزلي الأبدي الجالس على عرشه.

 

آية (3): "رفعت الأنهار يا رب رفعت الأنهار صوتها ترفع الأنهار عجيجها."

الأَنْهَار= تشير للروح القدس (يو37:7-39). الذي عَمِلَ في الرسل فإرتفعت أصواتهم في كل المسكونة= تَرْفَعُ الأَنْهَارُ عَجِيجَهَا. لتنتشر مملكة المسيح لقد إنتشر تلاميذ المسيح في كل المسكونة، وكل منهم يفيض من بطنه نهر ماء ليحيي المائتين من غير المؤمنين الوثنيين. الأنهار هنا هى التى ترفع صوتها، والأنهار تشير لعمل الروح القدس فى المؤمنين. والأصوات هنا هى أصوات تسبيح المؤمنين على الخلاص الذى نالوه.

عجيجها = العجيج هو صوت عالٍ، صوت تسابيح مرفوعة من لسان ومن كل أمة.

 

آية (4): "من أصوات مياه كثيرة من غمار أمواج البحر الرب في العلى أقدر."

مِنْ أَصْوَاتِ مِيَاهٍ كَثِيرَةٍ = المياه هنا غير المياه فى الآية السابقة. هنا هى مياه أمواج البحر. والبحر يشير للعالم الذى هاج ضد المسيح وكنيسته، المياه هنا هى أصوات هياج العالم على كنيسة المسيح. لم يسكت إبليس أمام انتشار ملكوت الله، بل هاج وأهاج العالم ضد الكنيسة، وثار الإضطهاد ضد الكنيسة= غِمَارِ أَمْوَاجِ الْبَحْرِ. ولكن هنا آية تعطي إطمئنان= فِي الْعُلَى أَقْدَرُ. أي الله في العلى هو أقدر وأعظم من مؤامرات إبليس وحروبه. والدليل إستمرار الكنيسة بعد كل هذه المؤامرات الشيطانية. الْبَحْرِ هو إشارة للعالم باضطرابه وشدائده ومحنه وشهواته (الماء المالح).

 

آية (5): "شهاداتك ثابتة جدًا ببيتك تليق القداسة يا رب إلى طول الأيام."

شهاداتك ثابتة جدًا= كل النبوات التي قيلت عن المسيح تحققت تمامًا. ببيتك تليق القداسة= لقد حررنا المسيح واشترانا وملك علينا وصرنا شعبه فما هو واجبنا؟ أن نسلك بقداسة وطهارة كل أيامنا. حتى يستمر علينا ذلك الثوب الذي أخذناه في المعمودية ولا نوجد عراة فنطرد إلى خارج (راجع مثل عرس ابن الملك) فمن لم يوجد عليه ثوب العرس طردوه (مت1:22-14).

 

ونصلي بهذا المزمور أثناء ارتداء الملابس البيضاء (ملابس الخدمة في الهيكل) لنذكر أن المسيح بفدائه سترنا وألبسنا ثوب بره.

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