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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القس أنطونيوس فكري

مزمور 119 (118 في الأجبية) - قطعة ي - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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قطعة (ى) استسلام كامل للنفس بين يدي الله صانعها

 

آية (73): "يداك صنعتاني وأنشأتاني. فهمني فأتعلّم وصاياك."

المرنم يطلب من الله أن يعلمه وصاياه فهو صنعة يديه. والله خلقنا على صورته وعندما خالفنا وصيته خسرنا صورة المجد التي كان عليها الإنسان. والمرنم يطلب أن يعطيه الله فهماً للوصية لينفذها ويقترب من الصورة التي ترضى الله صانعه. والآن بعد حلول الروح القدس على المؤمنين، يعمل روح الله فينا ليتصور المسيح فينا (غل19:4) وهذا لكل من لا يقاوم عمل الروح القدس. وكل من يخضع بين يدي الله ولا يقاوم عمل الروح وينفذ الوصايا، يأخذ صورة المسيح = "يلبس المسيح" ويكون له صورة محبته ووداعته وتواضعه. وبعد في السماء نكون مثله أيضاً (1يو2:3). يَدَاكَ = اليد تشمل الذراع والأصابع. والذراع تشير للقوة أي يد الله وتشير للمسيح قوة الله، الذي كان فداؤه وعمله الخلاصي بقوة (إش12:45) منها تفهم أن يد الله هي التي صنعت كل الخليقة. + (يو3:1) منها نفهم أنه بدون الكلمة (المسيح) لم يكن شيء مما كان، فهو الذي خلق كل شيء + (إش 10:40، 11) نرى فيها صورة ذراع الرب (المسيح) تجمع الحملان فهو الراعي الصالح. وعن التجسد يقول إشعياء(9:51). والأصابع تشير للروح القدس ونفهم هذا بمقارنة الآيتين (مت28:12 + لو20:11) فالمسيح صنع الخلاص بقوة. ولكن من يعيد تشكيل الإنسان وخلقته خلقة جديدة هو الروح، أصابع الله التي تشكل الإنسان، كأصابع الخزاف التي تشكل الإناء ونلاحظ أن اليد والأصابع تخرجان من جسد الإنسان. وهكذا الابن يولد من الآب والروح القدس ينبثق منه أيضاً.

صنعتاني

جبلتاني

- تشير لخلقة النفس بنفخة من الله. وهذا عمل الروح القدس.

- تشير لعمل الروح القدس في تثبيت المعمد في المسيح وتجديده ليصير صورة المسيح.

- تشير لخصوصية وضع الإنسان لدى الله. فالروح القدس يعطى حياة للإنسان ثم يثبته في المسيح بعد الفداء، ثم يظل يعمل فيه ليجدده.

- تشير لخلقة الجسد إذ جبل الله تراباً من الأرض. وهذا عمل الابن (تك2 : 7).

- تشير إلى عمل المسيح في الفداء. فهو مات وقام وصعد وتمجد، ليأتي عمل الروح القدس بعد ذلك ليشركني في هذه البركات.

- تشير لخلقة الإنسان كأى خليقة أخرى.

 

ولأن الإنسان العاقل له وضع خاص لدى الله، فعليه أن يلتزم بوصاياه.والوضع المثالي أن علامة محبة الله لآدم أن يفيض عليه الله من عطايا محبته. وعلامة محبة آدم لله أن يطيع وصاياه. والمرنم هنا يصلي لكي يكمل الله ما نقص من فهمه، فيعقل ويفهم كيف يسلك في وصايا الله. وقد تشير جبلتانى للخلقة الأولى وتشير صنعتانى للخلقة الثانية (راجع تفسير أف2: 10).

 

آية (74): "متقوك يرونني فيفرحون لأني انتظرت كلامك."

قارن مع "السماء تفرح بخاطئ واحد يتوب" وكل من يحب الله يفرح بعودة التائب.

  

الآيات (75-77): "قد علمت يا رب أن أحكامك عدل وبالحق أذللتني. فلتصر رحمتك لتعزيتي حسب قولك لعبدك. لتأتني مراحمك فأحيا لأن شريعتك هي لذّتي"

إعادة تشكيل الإنسان ليتجدد بحسب صورة خالقه، يستلزم في بعض الأحيان أن يؤدب الله النفس ببعض التجارب، ليذلها وينزع منها كبريائها، والمرنم المستسلم لعمل الله فيه، لا يقاوم هذا بل يطلب تعزيته وسط التجربة.

 

الآيات (78-80): "ليخز المتكبرون لأنهم زورا افتروا عليّ. أما أنا فأناجي بوصاياك. ليرجع إليّ متقوك وعارفو شهاداتك. ليكن قلبي كاملا في فرائضك لكيلا أخزى."

الْمُتَكَبِّرُونَ = إبليس ومن يتبعه، هؤلاء يشتكون على البار إن أخطأ والمرنم يصلي حتى يكون قلبه كاملاً فلا تكون هناك فرصة للمتكبرين أن يخزوه ويشتكوا عليه. وقد يزوروا التهم وفي هذا يلجأ المرنم لله ويتمسك به= أُنَاجِي بِوَصَأيَاكَ = وهذا نتعلمه من السيد المسيح الذي كان يرد علي خداعات ابليس بوصايا الكتاب. ويفهم التزوير أيضاً بأنه يشير لخداعات إبليس للأبرار مثلما فعل مع آدم وحواء ليسقط الأبرار. ولكن من يتمسك بالوصية ينجو. ومن يتمسك بالوصية يُخزِى إبليس. والعكس فمن يقبل خداعات إبليس ويسقط، يَخْزَي ويذله إبليس. 79لِيَرْجعْ إِلَيَّ مُتَّقُوكَ = يعودوا إليَّ إذ يروا أن الله أظهر الحق وأظهر براءتى من إتهاماتهم الظالمة، ويفرحوا معي بعمل الله وخيراته للأبرار. أما لو كنت حقا أعمل شرورا فسأخزى، لذلك يطلب المرنم لِيَكُنْ قَلْبِي كَأمِلاً فِي فَرَائِضِكَ لِكَيْلاَ أَخْزَى.

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