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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 33 - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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هذا المزمور كُتِبَ كتكملة للمزمور السابق. فالمزمور (32) حدثنا عن بركات الغفران وهنا نرى من شعر بهذه البركات وبقبول الله له يسبح الله بفرح على عطاياه الإلهية. ولقد انتهى (مز32) بنداء للتائبين الذين غفر لهم الله بأن يسبحوا ونجد هنا الاستجابة.

هنا يذكر المرنم أعمال الله العجيبة مع شعبه (شق البحر وهلاك فرعون وجنوده) كسبب للتسبيح. فالله الذي أنقذ شعبه يومًا هو هو لا يتغير ومحبته لنا دائمًا كل يوم.

 

الآيات (1-3): "اهتفوا أيها الصديقون بالرب. بالمستقيمين يليق التسبيح. احمدوا الرب بالعود. بربابة ذات عشرة أوتار رنموا له. غنوا له أغنية جديدة. احسنوا العزف بهتاف."

التسبيح هو عمل المستقيمين أي التائبين، أما النفوس المعوجة المستعبدة للخطية لا تستطيع أن تسبح (مز137). وهنا يطلب المرنم أن نسبح بآلات موسيقية في آية (2) وهي آلات كانت تستخدم في العهد القديم. والله يفضل أن نسبحه بأجسادنا ونفوسنا، أي بأعمالنا الصالحة (أجساد) وبمحبتنا (نفوس) وتواضعنا (الروح). وفي هذه الآلات أي (الجسد والنفس والروح) ينفخ الروح القدس، فلو تجاوبنا معه تصدر نغمات تفرح الله. غنوا له أغنية جديدة= هي ثمر عمل الروح القدس مع حواسنا الجديدة.

 

الآيات (4-18): "لأن كلمة الرب مستقيمة وكل صنعه بالأمانة. يحب البر والعدل. امتلأت الأرض من رحمة الرب. بكلمة الرب صنعت السموات وبنسمة فيه كل جنودها. يجمع كندّ امواه اليم يجعل اللجج في إهراء. لتخش الرب كل الأرض ومنه ليخف كل سكان المسكونة. لأنه قال فكان. هو أمر فصار. الرب ابطل مؤامرة الأمم. لاشى أفكار الشعوب. أما مؤامرة الرب فإلى الأبد تثبت. أفكار قلبه إلى دور فدور. طوبى للامّة التي الرب إلهها الشعب الذي اختاره ميراثا لنفسه. من السموات نظر الرب. رأى جميع بني البشر. من مكان سكناه تطلّع إلى جميع سكان الأرض. المصوّر قلوبهم جميعا المنتبه إلى كل أعمالهم. لن يخلص الملك بكثرة الجيش. الجبار لا ينقذ بعظم القوة. باطل هو الفرس لأجل الخلاص وبشدة قوّته لا ينجّي. هوذا عين الرب على خائفيه الراجين رحمته."

لماذا نسبح الرب؟

[1] كلمة الرب مستقيمة = وصاياه صالحة أعطاها لنا لكي نحيا في فرح. ولما خالفناها أرسل كلمته المتجسد ليصلح انحرافنا.

[2] الأرض أمتلأت من رحمة الرب = مراحم الرب لا تنتهي وأقصى ما وصلت إليه هو صليب المسيح الذي به ستر على خطايانا فالله يحب البر والعدل= فهو بعدله قَبِل الصليب ليبررنا.

[3] هو خلق العالم كله لأجلنا= بكلمة الرب صنعت السموات= به كان كل شيء (يو3:1) وبنسمة فيه كل جنودها = فروح الله كان يرف على المياه فخرجت منها الحياة.

[4] الله يحفظ العالم بقوته، فالمياه مجتمعة في أماكنها في البحر ولا تغرق الأرض= يجمع كند أمواه المياه. أمواه= جمع مياه. بل أن الله شق البحر الأحمر أمام موسى والشعب وجمع المياه كند أي كومة، وكما قيل في سفر الخروج كسورٍ من كل ناحية.أهراء = مخازن. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). هكذا يُصوِّر المرنم البحار والمحيطات أنها مخازن تحفظ أكوام المياه والله وضع لها خطًا لا تتعداه.

[5] الله يبطل مؤامرات الأعداء ضد شعبه.

[6] مؤامرة الرب فإلى الأبد تثبت= خطة الرب. وخطة الرب التي تثبت هي خطة الخلاص بالصليب والقيامة، وأبطل الله مؤامرات الأعداء الذين اضطهدوا الكنيسة كالرومان واليهود [7] الرب من السموات ينظر برحمته وإنعاماته على شعبه الذي فداه ويتعهدهم بمراحمه.

[8] بروحه القدوس يعيد صورتنا إلى صورة المسيح ويعطينا ثمار الروح (غل19:4 + 22:5، 23).

[9] الله هو قوة شعبه (آية18).

[10] كل قوات الشر التي تحيط بالكنيسة هي كلا شيء (آية17) ولنرى ماذا حدث لفرعون وجنوده لذلك طوبى للأمة التي الرب إلهها. ولذلك لتخش الرب كل الأرض.

 

الآيات (19-22): "لينجّي من الموت أنفسهم وليستحييهم في الجوع. أنفسنا انتظرت الرب. معونتنا وترسنا هو. لأنه به تفرح قلوبنا لأننا على اسمه القدوس اتكلنا. لتكن يا رب رحمتك علينا حسبما انتظرناك."

أنفسنا انتظرت الرب= نحن نصبر في أي ضيقة لأننا نثق في مراحم الله.

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