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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القس أنطونيوس فكري

مزمور 119 (118 في الأجبية) - قطعة ب - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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قطعة (ب) نصيحة للشباب

 

في القطعة الأولى وضع المرنم القاعدة وهي الطوبى لمن يحفظ الوصية. وهنا كمجرب يعطي المرنم نصيحة للشباب أن يحفظوا الوصية فتكون لهم بركة في حياتهم.

 

آية (9): "بم يزكي الشاب طريقه. بحفظه إياه حسب كلامك."

بِمَ يُزَكِّي الشَّابُّ طَرِيقَهُ = "بم يُقَوِّم الشاب طريقه" (سبعينية). أي كيف يسيرون في طريق مضمون يؤدي للحياة الأبدية، بالإضافة للبركات التي يحصل عليها هنا على الأرض. ما الذي يزكيه ليحصل على هذا، هو أمامه طرق كثيرة، فالعالم يجذبه بمغرياته، والمرنم يشفق على الشاب فيعطيه نصيحة ثمينة. بِحِفْظِهِ إِيَّاهُ = أي يصحح طريقه ليكون مطابقا للوصية = حَسَبَ كَلاَمِكَ = أي يحفظ الشاب طريقه ليكون مطابقا لكلام الله وإن إنحرف عن الطريق فعليه أن يعود للطريق الصحيح الذي هو بحسب الوصية كلام الله وهذا معنى قول المرنم "سراج لرجلى كلامك ونور لسبيلى" (مز119: 105)، فإذا حفظ الوصية يحفظ نفسه. والمرنم يوجه النصيحة للشباب، فالشاب بطبيعته مندفع. أما الشيخ فهو إما نضج أو ضعف. ولذلك فالجامعة يقول نفس النصيحة "أذكر خالقك أيام شبابك" (جا1:12).

 

آية (10): "بكل قلبي طلبتك. لا تضلني عن وصاياك."

من كُلِّ قَلْبِي = حينما أدرك أنه في حفظ الوصية بركات عظيمة فهنا نجده يطلب الله من كل قلبه حتى لا يضل مرة أخرى عن الطريق . والله يعلن ذاته لمن يطلبه بكل صدق، ولا يطلب سواه. وهنا المرنم يطلب من الله أن يعينه أن يستمر طوال حياته يدرس كلمة الله ويحاول أن ينفذها ولا يضل عن هذا. لاَ تُضِلَّنِي عَنْ وَصَأيَاكَ = الله لا يضل أحد والمعنى إن أنا ضللت أعدنى للطريق. وفي الإنجليزية "لا تدعنى أحيد عن وصاياك ".

oh, let me not wander from your commandments.

وفي السبعينية "فلا تبعدنى عن وصاياك".

 

آية (11): "خبأت كلامك في قلبي لكيلا أخطئ إليك."

نجد المرنم هنا قد حفظ كلام الله ووصاياه، فيستطيع أن يرددها في كل مكان وزمان ويستطيع أن يقارن كل تصرف له على ما يحفظه من كلام الله. والإنسان لا يخبئ إلا كل ما هو ثمين، فهو قد اكتشف أن كلمة الله كنز، وسلاح خطير ضد حروب إبليس (هكذا فعل المسيح) ولذلك قيل "من يحفظ المزامير تحفظه المزامير" فهو يرددها وسط أعماله أو سيره فلا تهاجمه الأفكار الخاطئة.

 

St-Takla.org Image: David often sang about the importance of obeying God God: ‘How can a young man stay pure? By reading your Word and following its rules. I have tried my best to find you—don’t let me wander off from your instructions. I have thought much about your words and stored them in my heart so that they would hold me back from sin’ (Psalm 119:9-11). - Psalms, Bible illustrations by James Padgett (1931-2009), published by Sweet Media صورة في موقع الأنبا تكلا: كان داود يترنم دائمًا بأهمية طاعة الله: "بم يزكي الشاب طريقه؟ بحفظه إياه حسب كلامك. بكل قلبي طلبتك. لا تضلني عن وصاياك. خبأت كلامك في قلبي لكيلا أخطئ إليك" (المزامير 119: 9-11) - صور سفر المزامير، رسم جيمز بادجيت (1931-2009)، إصدار شركة سويت ميديا

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صورة في موقع الأنبا تكلا: كان داود يترنم دائمًا بأهمية طاعة الله: "بم يزكي الشاب طريقه؟ بحفظه إياه حسب كلامك. بكل قلبي طلبتك. لا تضلني عن وصاياك. خبأت كلامك في قلبي لكيلا أخطئ إليك" (المزامير 119: 9-11) - صور سفر المزامير، رسم جيمز بادجيت (1931-2009)، إصدار شركة سويت ميديا

آية (12): "مبارك أنت يا رب. علمني فرائضك."

إذ تأمل المرنم في كيف تحفظ الوصية قلبه، طلب من الله أن يعلمه هذه الوصايا، ويدربه كيف يسلك فيها. ولاحظ الأسلوب الرائع فهو قبل أن يطلب يعطي المجد لله الذي يعطيه كل بركة وقد أعطاه الكثير فعلا. مُبَارَكٌ أَنْتَ يَا رَبُّ = أي تستحق كل تسبيح وحمد.

 

آية (13): "بشفتيّ حسبت كل أحكام فمك."

من اختبر عمل الله لا يطيق السكوت، بل يشهد لله على عطاياه وأعماله العجيبة.وهكذا فعلت السامرية "هلموا انظروا إنساناً قال لي كل ما فعلت" (يو29:4). (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). حَسَبْتُ = أظهرت (سبعينية) وفي (الانجليزية) =أوضحت.

 

آية (14): "بطريق شهاداتك فرحت كما على كل الغنى."

هذه قامة روحية عالية أن يفرح الإنسان بكلام الله أكثر من كل غني. هنا أصبحت الوصية ليست ثقلاً بل مصدر فرح. من قال هذا قال "ذوقوا وانظروا ما أطيب الرب" (في7:3، 8 + مت44:13-47). الغنى قد يأتي ومعه آلام وكآبة، أما طريق الله فكله تعزيات وفرح يتغلب على آلام الطريق، فهو فرح يعطيه الرب "ولا ينزع أحد فرحكم منكم" (يو16: 22).

 

الآيات (15، 16): "بوصاياك الهج وألاحظ سبلك. بفرائضك أتلذذ. لا أنسى كلامك."

المرنم الذي اكتشف الفرح في كلام الله، نجده هنا دائم التأمل فيه وفي طرقه. والتأمل وترديد كلام الله باستمرار ينقى ويطهر (راجع لا 11 فالحيوانات الطاهرة هي التي تجتر) ويقول الرب " وأنتم الآن أنقياء لسبب الكلام إلى كلمتكم به" (يو15: 3). ومن يتطهر ويتنقى تنفتح عيناه فيعاين الرب فيفرح.

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