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شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 144 - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
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المزامير الأربعة السابقة (140-141-142-143) كانت لداود حين كان هاربًا من شاول. أما هذا المزمور فيبدو أن داود كتبه بعد أن ملك. ولكننا نسمع فيه أنه مازال يحارب وأن هناك أعداء. فمتى كان هناك سلام نهائي بلا حروب في هذا العالم. فلقد قام عليه الفلسطينيين والعمونيين.. إلخ. وداود هنا يقدم الشكر لله الذي أجلسه على العرش. ويصلي لله حتى ينصره على أعدائه وهو واثق أنه سينتصر فهو اختبر هذا مرارًا من قبل، أن الله لا يتركه. ويصلي لأجل ازدهار مملكته وشعبه. وروحيًا فنحن نمر كل يوم في حروب روحية جديدة ولكننا نجتاز من نصرة إلى نصرة بمعونة الله. وحقًا لقد أقامنا الله ملوكًا (رؤ6:1) ولكن مازال هناك قتال كثير وحروب كثيرة. والله يعيننا فهو خرج غالبًا ولكي يغلب (رؤ2:6) وكما فعل داود وصلى لشعبه، هكذا فلنصلي لكل الكنيسة ليعطها الرب بركة ونعمة وانتصارًا ضد أعدائنا الحقيقيين أي الشيطان وجنوده. (راجع أف 6).

 

الآيات (1، 2): "مبارك الرب صخرتي الذي يعلم يدي القتال وأصابعي الحرب. رحمتي وملجأي صرحي ومنقذي مجني والذي عليه توكلت المخضع شعبي تحتي."

الله علم داود القتال ضد أسد ثم ضد دب ثم ضد جليات حتى لا يرهب الحروب الآتية ضده. فالله دربه ويدربنا كيف نغلب أعدائنا، بأن يسمح ببعض التجارب، وحينما نستعين به نغلب، نستعين بالصلاة والصراخ له، بالإيمان، (باقي الأسلحة في أف 6) وحينما نغلب تكون أيادينا قد تعلمت القتال. ونحن نقاتل بلا خوف فلنا ثقة في الله ملجأنا.

 

الآيات (3، 4): "يا رب أي شيء هو الإنسان حتى تعرفه أو ابن الإنسان حتى تفتكر به. الإنسان أشبه نفخة. أيامه مثل ظل عابر."

يقف داود مندهشًا من محبة الله وعمله من أجل الإنسان الترابي الحقير.

 

الآيات (5-8): "يا رب طأطئ سمواتك وانزل المس الجبال فتدخن. ابرق بروقا وبددهم. أرسل سهامك وأزعجهم. أرسل يدك من العلاء. أنقذني ونجني من المياه الكثيرة من أيدي الغرباء. الذين تكلمت أفواههم بالباطل ويمينهم يمين كذب."

المرنم يصرخ لله لكي يعينه وينصره ضد أعدائه، ويظهر قوته فيرعبهم يرسل بروقًا وسهامًا فيزعجهم. ولكن النبي بروح النبوة كان يتكلم عن المسيح الذي طأطأ السموات ونزل وتجسد وأرسل الرسل كسهام نشرت الكرازة فأزعجت الشياطين الذين تكلمت أفواههم بالباطل. ويمينهم يمين كاذب= اليمين إشارة للقوة، والشيطان يوهمنا بقوته ولكن قوته باطلة مخادعة، وأي مؤمن بعلامة الصليب بإيمان وباسم يسوع يغلبهم وقول النبي طأطأ السموات وإنزل. لا تعني أن الله سيترك السماء وينزل على الأرض فهو في كل مكان حتى في الهاوية (8:139) ولكن معناها أظهر قوتك فتدخن الجبال فيرتعب الأعداء. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). وهذا حدث فعلًا على جبل سيناء. ولكن المعنى النبوي للآية هو تجسد المسيح ونزوله على الأرض. والنبي كان يتكلم عن القتال. والمسيح جاء للقتال فعلًا ضد إبليس الذي في كبريائه كالجبل وبصليبه لمسه فدخن. وبصليبه أنقذنا من الموت= إنقذني ونجني من المياه الكثيرة= أي الموت. من الغرباء= الشياطين. أرسل يدك من العلاء= هي مرة أخرى نبوة عن تجسد المسيح قوة الله ويد الله التي هزمت أعدائنا.

طأطئ سمواتك = طأطئ =  bow down = إحني. ولاحظ الدقة في النبوة، فالمسيح لم يترك السماء حين تجسد (يو 3: 13) بل هو أتى بالحياة السماوية إلينا علي الأرض لنحيا في السماويات (أف 2 : 6).

 

الآيات (9-11): "يا الله أرنم لك ترنيمة جديدة برباب ذات عشرة أوتار أرنم لك. المعطي خلاصا للملوك المنقذ داود عبده من السيف السوء. أنقذني ونجني من أيدي الغرباء الذين تكلمت أفواههم بالباطل ويمينهم يمين كذب."

ماذا يفعل من شعر بخلاص المسيح وامتلأ بالروح إلا أن يشكر الله ويسبحه. ويعود ويصرخ لينقذه الله. فالحرب لا تهدأ ولا تتوقف طالما نحن أحياء.

 

الآيات (12-15): "لكي يكون بنونا مثل الغروس النامية في شبيبتها. بناتنا كأعمدة الزوايا منحوتات حسب بناء هيكل. اهراؤنا ملآنة تفيض من صنف فصنف. أغنامنا تنتج ألوفًا وربوات في شوارعنا. بقرنا محملة. لا اقتحام ولا هجوم ولا شكوى في شوارعنا. طوبى للشعب الذي له كهذا. طوبى للشعب الذي الرب إلهه."

صلاته لأجل شعبه ليحيوا في سلام. فالبنون في صحة. والبنات في قداسة و أهراؤنا = أي مخازننا مملوءة، والبقر مملوء لبن ليشبع الجميع. والأعداء خاضعين لا يقتحموا أسوارنا. هذه هي صورة الكنيسة والمسيح في وسطها. مملوءة وقادرة أن تشبع الجميع. ومعلميها قادرين أن يُرضِعوا أولادهم لبنًا. والأولاد مملوئين صحة وحيوية ونشاط قادرين على الخدمة. والبنات كأعمدة الزوايا= تبني بيتها وهي بأخلاقها قادرة أن تربط عائلتها بعائلة زوجها برباط محبة فتترابط العائلتين. منحوتات حسب بناء الهيكل كانت الحجارة تنحت وتهذب ليؤتي بها إلى مكان الهيكل وتوضع في مكانها. والمعنى لتكن بناتنا هكذا قد تم تهذيبهم وهن على جمال  خُلُقي ويؤتي بهن ليسكنوا مع أزواجهن في فرح. وعمومًا فبيوت أولاد الله هي كنائس صغيرة أو هياكل صغيرة. (1كو19:16).

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