St-Takla.org  >   pub_Bible-Interpretations  >   Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament  >   Father-Antonious-Fekry  >   21-Sefr-El-Mazameer
 

شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 14 (13 في الأجبية) - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
تفسير سفر مزمور: فهرس المزامير بالرقم | فهرس المزامير حسب الأجبية | مقدمة للبابا شنودة | مقدمة سفر المزامير | مزامير الأجبية | مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 (قطعة: أ - ب - ج - د - هـ - و - ز - ح - ط - ي - ك - ل - م - ن - س - ع - ف - ص - ق - ر - ش - ت) | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | ملخص عام لسفر المزامير

نص سفر مزمور: مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | المزامير كامل

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح

← اذهب مباشرةً لتفسير الآية: 1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

هو نفس كلمات المزمور 53 والفرق أن اسم يهوه هنا تكرر 4 مرات، وقيل في مزمور 53 مرة واحدة فقط.

قال البعض أن داود كتب هذا المزمور في فترة اضطهاد شاول له وقال البعض في فترة ثورة إبشالوم. ولكن الكتاب لم يوضح. ولكن غالبًا فهذا المزمور كُتِبَ بصورة عامة ليظهر فكرة معينة. فالقديس بولس الرسول اقتبس من هذا المزمور في (رو3) ليثبت أن اليهود والأمم كلاهما سقطا تحت الخطية، وأن كل العالم مذنب أمام الله. وبهذا نفهم أن العالم كله ناقص وغير كامل وكل بني آدم مولودين في الخطية "بالخطايا ولدتني أمي" فنحن نرث خطية أبينا آدم "الخطية الجدية أو الأصلية". هنا نرى صورة لفساد الجنس البشري (1يو19:5). ولم يكن هناك علاج سوى بالمسيح. فالخطية جرحت البشر وقتلتهم وجاء المسيح ليجرحه الخطاة ويقتلوه فيداوي جروحنا ويحيينا. وداود إذا صوَّر نفسه على أنه البار الذي تعرض لهجمات وظلم الأشرار فهو رمز للمسيح البار في آلامه. وكل الآلام التي تعرض لها داود سواء في الكلمات الظالمة والإشاعات الرديئة أو كل الآلام التي وقعت عليه من الأشرار. أو الآلام التي وقعت على المسيح وتقع على كنيسته راجعة إلى فساد الجنس البشري كله. لذلك يقسم المرنم البشر لقسمين [1] الجهلاء وهم عديمي القيم، الذين يرفضون الله ويرفضون شريعته [2] الأبرار أو شعب الله المتألم.

 

الآيات (1-3): "قال الجاهل في قلبه ليس اله. فسدوا ورجسوا بأفعالهم. ليس من يعمل صلاحًا. الرب من السماء اشرف على بني البشر لينظر هل من فاهم طالب الله. الكل قد زاغوا معا فسدوا. ليس من يعمل صلاحًا ليس ولا واحد.

في آية (1) نرى سببين للإلحاد:-

[1] الْجَاهِلُ = أي إن تصوّر الإنسان أن لا إله.

[2] الفَساَدُ: وجود شهوة في القلب. وفي معظم الأحيان تكون الشهوة الفاسدة في القلب سبباً في إنكار وجود الله حتى لا يزعجوا ضمائرهم ويتمادون في شهواتهم، وبالتالي فهم غير ملتزمين بوصايا الله، وهذا ما قاله أغسطينوس.

قَالَ الْجَاهِلُ فِي قَلْبِهِ = فمن القلب تخرج الدوافع الشريرة (إر9:17). ونرى أن هذا الفساد قد عمَّ وسط كل بني آدم. وإحتاج البشر إلى تجديد. اَلرَّبُّ مِنَ السَّمَاءِ أَشْرَفَ = تشير لأن الله مطلع على كل شيء ويعرف خفايا القلوب. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). فَاهِمٍ = حكيماً ومتعقل وقد وردت بعد هذا في الترجمة السبعينية بعض آيات لم ترد في الترجمة العبرية وهي: "حنجرتهم قبر مفتوح، مكروا بلسانهم. سم الأفاعي تحت شفاههم، أفواههم مملوءة لعنة ومرارة، أرجلهم سريعة إلى سفك الدماء. والإنكسار والشقاء في سبلهم، وطريق السلامة لم يعرفوها. ليس خوف الله أمام أعينهم، أليس يعلم جميع عاملي الإثم" وهذا ما اقتبسه بولس الرسول في (رو3). فالعهد الجديد كان يقتبس من النسخة السبعينية.

 

آية (4): "ألم يعلم كل فاعلي الإثم الذين يأكلون شعبي كما يأكلون الخبز والرب لم يدعوا."

نرى هنا نتيجة من نتائج ترك الله بالإضافة لفساد طبعه وهي ظلم المساكين. فلقد امتلأت قلوبهم فساداً وظلماً وقسوة. فكانوا يأكلون المساكين كَمَا يَأْكُلُونَ الْخُبْزَ. ونتيجة أخرى كانت الاعتزاز بالنفس وعدم الالتجاء لله= وَالرَّبَّ لَمْ يَدْعُوا. وهذا ناتج عن الكبرياء أن لا يكون للإنسان علاقة بالله فلا يصلى ولا يطلبه.

 

 آية (5): "هناك خافوا خوفًا لأن الله في الجيل البار."

نرى هنا صورة فيها تناقض فالأشرار رغم قسوتهم وجبروتهم نجدهم خائفون إذ لا سلام للأشرار= هناك خافوا خوفًا. أما الأبرار فالله في وسطهم مصدر سلامهم. وقد ظهر المسيح وسط شعب اليهود فخافوا منه أن يأخذ نصيبهم حينما يلتف الشعب حوله فقاموا وقتلوه. الأشرار في خوف حتى لا تضيع منهم مملكتهم الأرضية، أي كرامتهم وسلطانهم وغناهم. ومع الكنيسة يحدث نفس الشيء، فالأشرار يضطهدونها فهم يخافون أن تسلبهم مجدهم الزمني. ولكن الله يتجلي وسط أولاده ووسط كنيسته ويعلن عن حلوله وسكناه في وسطهم= لأن الله في جيل الأبرار.

 

آية (6): "رأي المسكين ناقضتم لأن الرب ملجأه."

المسكين هم أولاد الله الذين يقوم ضدهم الأشرار ثائرين على أقوالهم، فإبليس يحرك هؤلاء الأشرار. وإبليس لا يحتمل أولاد الله الذين لهم الرب ملجأ يحتمون به. ولكن قد يضحك الأشرار على الأبرار إلى حين. فالله ملجأهم لن يتخلى عنهم.

 

آية (7): "ليت من صهيون خلاص إسرائيل. عند رد الرب سبي شعبه يهتف يعقوب ويفرح إسرائيل."

تسبحة رجاء من العهد القديم أن المخلص سيأتي من صهيون ليخلص إسرائيل. ولقد تجسد المسيح من وسط اليهود ليخلص كنيسته. ويحررها من سبي إبليس والخطية فتفرح الكنيسة بالخلاص وتسبح = يَهْتِفُ يَعْقُوبُ، وَيَفْرَحُ إِسْرَائِيلُ . وكل نفس بعيدة عن الله تعتبر في سبي إبليس.

St-Takla.org                     Divider فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

← تفاسير أصحاحات مزامير: مقدمة | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | 64 | 65 | 66 | 67 | 68 | 69 | 70 | 71 | 72 | 73 | 74 | 75 | 76 | 77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85 | 86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | 108 | 109 | 110 | 111 | 112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | 121 | 122 | 123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149 | 150 | 151

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح


© st-takla.org موقع الأنبا تكلا هيمانوت: بوابة عامة عن عقيدة الكنيسة القبطية الأرثوذكسية، مصر / إيميل:

الكتاب المقدس: بحث، تفاسير | القراءات اليومية | الأجبية | أسئلة | طقس | عقيدة | تاريخ | كتب | شخصيات | كنائس | أديرة | كلمات ترانيم | ميديا | صور | مواقع | اتصل بنا

https://st-takla.org/pub_Bible-Interpretations/Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament/Father-Antonious-Fekry/21-Sefr-El-Mazameer/Tafseer-Sefr-El-Mazamir__01-Chapter-014.html