St-Takla.org  >   pub_Bible-Interpretations  >   Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament  >   Father-Antonious-Fekry  >   21-Sefr-El-Mazameer
 

شرح الكتاب المقدس - العهد القديم - القمص أنطونيوس فكري

مزمور 88 - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير لـ داؤود (مزامير داود):
تفسير سفر مزمور: فهرس المزامير بالرقم | فهرس المزامير حسب الأجبية | مقدمة للبابا شنودة | مقدمة سفر المزامير | مزامير الأجبية | مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 (قطعة: أ - ب - ج - د - هـ - و - ز - ح - ط - ي - ك - ل - م - ن - س - ع - ف - ص - ق - ر - ش - ت) | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | ملخص عام لسفر المزامير

نص سفر مزمور: مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | المزامير كامل

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح

← اذهب مباشرةً لتفسير الآية: 1 - 2 - 3 - 4 - 5 - 6 - 7 - 8 - 9 - 10 - 11 - 12 - 13 - 14 - 15 - 16 - 17 - 18

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

هذا المزمور هو شكوى لله من آلام وضيقات أحاطت بالمرنم. ولم ينتهي كالعادة بأن يتعزى باستجابة الله له، ولكن المرنم لم يكف عن الصلاة والالتجاء إلى الله بالرغم من أنه لا يشعر بأي تعزية. وهذا درس لكل متألِّم أن لا يكف عن الصلاة حتى ولو لم يشعر بتعزية. فكثيرين نسمع منهم أنهم كفوا عن الصلاة لأنهم صلوا والله لم يستجب.

 

الآيات (1، 2): "يا رب إله خلاصي بالنهار والليل صرخت أمامك. فلتأت قدامك صلاتي. أمل أذنك إلى صراخي."

لاحظ أنه يصلي بلا انقطاع الليل والنهار. وبصراخ من القلب في ضيقته.

 

الآيات (3، 4): "لأنه قد شبعت من المصائب نفسي وحياتي إلى الهاوية دنت. حسبت مثل المنحدرين إلى الجب. صرت كرجل لا قوة له."

هو وصل إلى غاية الأحزان وإلى درجة الشبع. بل مثل ميت بلا قوة.

 

الآيات (5، 6): "بين الأموات فراشي مثل القتلى المضطجعين في القبر الذين لا تذكرهم بعد وهم من يدك انقطعوا. وضعتني في الجب الأسفل في ظلمات في أعماق."

تصوير بائس لحالته فهو كميت قد نسيه الله في قبره، ولا يمد الله له يده بأي مساعدة، بل هو في ظلمات. إن الآلام النفسية العميقة تكون شديدة جدًا.

 

آية (7): "عليّ استقر غضبك وبكل تياراتك ذللتني. سلاه."

غضب الله على الإنسان لا يكون إلا بسبب خطيته. وهو يذلل الإنسان حتى تنتهي كبرياؤه ويتوب ويرجع فيخلص. والعجيب أن ما قيل في الآيات السابقة وهذه الآية بالذات قد احتمله المسيح لأجلنا. فهو الذي احتمل آلامًا جسدية وإهانات وآلامًا نفسية، بل وضع في قبر فعلًا، وتحمل غضب الآب بل نزل إلى الجحيم ليخرج منه من مات على الرجاء. هو صار خطية وصار لعنة لأجلنا.

 

الآيات (8، 9): "أبعدت عني معارفي. جعلتني رجسا لهم. اغلق عليّ فما اخرج. عيني ذابت من الذل. دعوتك يا رب كل يومً. بسطت إليك يدي."

شعور مؤلم أن يتخلى الأصدقاء عن صديقهم وهو في ضيقته، وهذا ما حدث مع أيوب= جعلتني رجساُ لهم= إذ ظنوه مضروبًا بسبب خطاياه وأن الله ينتقم منه وبالنسبة للمسيح فقد تخلى عنه الجميع. ولكن يحسب للمرنم أنه لم يكف عن الصلاة= بسطت يدي.

 

الآيات (10-12): "أفلعلك للأموات تصنع عجائب أم الأخيلة تقوم تمجدك. سلاه. هل يحدث في القبر برحمتك أو بحقك في الهلاك. هل تعرف في الظلمة عجائبك وبرك في ارض النسيان."

هو صور نفسه كميت، وفي يأسه يقول، كيف يتدخل الله الآن ليغير من حالي هل يقيم الله أموات، هل يصنع معجزة مع ميت، أنا حالتي ميئوس منها. الأَخِيلَةُ هي نفوس الموتى في الهاوية. هل تصنع مع الموتى عجائب فيسبحونك عليها، أم هل لهم لسان ليسبحونك. (انظر المزيد عن هذا الموضوع هنا في موقع الأنبا تكلا في أقسام المقالات والتفاسير الأخرى). قطعاً في ذهن مرنم العهد القديم أن بركات الله هي بركات مادية يعطيها الله في هذه الحياة ، وهذه يسبح البشر عليها الله الذي أعطاها لهم. والمرنم كميت يسأل ماذا سيعطيه الله ليسبحه عليه. وروحياً نفهم هذا أن من إنغمس في الخطية لدرجة الموت لا يعود يشعر بعمل الله وبالتالي لا يعود يسبح الله على إحساناته.

 

آية (13): " أما أنا فإليك يا رب صرخت وفي الغداة صلاتي تتقدمك."

صلاتي تتقدمك= كأنه يجري أمام موكب الله الملك صارخًا أن يرحمه.

 

آية (15): " أنا مسكين ومسلم الروح منذ صباي. احتملت أهوالك. تحيرت."

هنا يذكر آلامه منذ صباه. وكأنه عاش كل أيامه قريبًا من الموت= مسلم الروح.

 

الآيات (16-18): "عليّ عبر سخطك. أهوالك أهلكتني. أحاطت بي كالمياه اليوم كله. اكتنفتني معا. أبعدت عني محبا وصاحبا. معارفي في الظلمة."

الظلمة= هي ضيقته التي هو فيها. وضيقته كانت ضيقات متعددة وغزيرة أحاطت به اليوم كله. بل هي أهوال مهلكة.

معارفى في الظلمة = أي اختفوا وما عدت أراهم.

St-Takla.org                     Divider فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

← تفاسير أصحاحات مزامير: مقدمة | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | 64 | 65 | 66 | 67 | 68 | 69 | 70 | 71 | 72 | 73 | 74 | 75 | 76 | 77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85 | 86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | 108 | 109 | 110 | 111 | 112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | 121 | 122 | 123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149 | 150 | 151

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح


© st-takla.org موقع الأنبا تكلا هيمانوت: بوابة عامة عن عقيدة الكنيسة القبطية الأرثوذكسية، مصر / إيميل:

الكتاب المقدس: بحث، تفاسير | القراءات اليومية | الأجبية | أسئلة | طقس | عقيدة | تاريخ | كتب | شخصيات | كنائس | أديرة | كلمات ترانيم | ميديا | صور | مواقع | اتصل بنا

https://st-takla.org/pub_Bible-Interpretations/Holy-Bible-Tafsir-01-Old-Testament/Father-Antonious-Fekry/21-Sefr-El-Mazameer/Tafseer-Sefr-El-Mazamir__01-Chapter-088.html