St-Takla.org  >   bible  >   commentary  >   ar  >   ot  >   church-encyclopedia  >   psalms
 
St-Takla.org  >   bible  >   commentary  >   ar  >   ot  >   church-encyclopedia  >   psalms

تفسير الكتاب المقدس - الموسوعة الكنسية لتفسير العهد القديم: كنيسة مارمرقس بمصر الجديدة

مزمور 131 (130 في الأجبية) - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير ل داؤود (مزامير داوود):
تفسير سفر مزمور: فهرس المزامير بالرقم | مقدمة سفر المزاميرمزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 - مقدمة مز 119 - (قطعة: أ - ب - ج - د - ه - و - ز - ح - ط - ي - ك - ل - م - ن - س - ع - ف - ص - ق - ر - ش - ت) | مقدمة مزامير المصاعد | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | ملخص عام لسفر المزامير

نص سفر مزمور: مزمور 1 | مزمور 2 | مزمور 3 | مزمور 4 | مزمور 5 | مزمور 6 | مزمور 7 | مزمور 8 | مزمور 9 | مزمور 10 | مزمور 11 | مزمور 12 | مزمور 13 | مزمور 14 | مزمور 15 | مزمور 16 | مزمور 17 | مزمور 18 | مزمور 19 | مزمور 20 | مزمور 21 | مزمور 22 | مزمور 23 | مزمور 24 | مزمور 25 | مزمور 26 | مزمور 27 | مزمور 28 | مزمور 29 | مزمور 30 | مزمور 31 | مزمور 32 | مزمور 33 | مزمور 34 | مزمور 35 | مزمور 36 | مزمور 37 | مزمور 38 | مزمور 39 | مزمور 40 | مزمور 41 | مزمور 42 | مزمور 43 | مزمور 44 | مزمور 45 | مزمور 46 | مزمور 47 | مزمور 48 | مزمور 49 | مزمور 50 | مزمور 51 | مزمور 52 | مزمور 53 | مزمور 54 | مزمور 55 | مزمور 56 | مزمور 57 | مزمور 58 | مزمور 59 | مزمور 60 | مزمور 61 | مزمور 62 | مزمور 63 | مزمور 64 | مزمور 65 | مزمور 66 | مزمور 67 | مزمور 68 | مزمور 69 | مزمور 70 | مزمور 71 | مزمور 72 | مزمور 73 | مزمور 74 | مزمور 75 | مزمور 76 | مزمور 77 | مزمور 78 | مزمور 79 | مزمور 80 | مزمور 81 | مزمور 82 | مزمور 83 | مزمور 84 | مزمور 85 | مزمور 86 | مزمور 87 | مزمور 88 | مزمور 89 | مزمور 90 | مزمور 91 | مزمور 92 | مزمور 93 | مزمور 94 | مزمور 95 | مزمور 96 | مزمور 97 | مزمور 98 | مزمور 99 | مزمور 100 | مزمور 101 | مزمور 102 | مزمور 103 | مزمور 104 | مزمور 105 | مزمور 106 | مزمور 107 | مزمور 108 | مزمور 109 | مزمور 110 | مزمور 111 | مزمور 112 | مزمور 113 | مزمور 114 | مزمور 115 | مزمور 116 | مزمور 117 | مزمور 118 | مزمور 119 | مزمور 120 | مزمور 121 | مزمور 122 | مزمور 123 | مزمور 124 | مزمور 125 | مزمور 126 | مزمور 127 | مزمور 128 | مزمور 129 | مزمور 130 | مزمور 131 | مزمور 132 | مزمور 133 | مزمور 134 | مزمور 135 | مزمور 136 | مزمور 137 | مزمور 138 | مزمور 139 | مزمور 140 | مزمور 141 | مزمور 142 | مزمور 143 | مزمور 144 | مزمور 145 | مزمور 146 | مزمور 147 | مزمور 148 | مزمور 149 | مزمور 150 | مزمور 151 | المزامير كامل

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح

← اذهب مباشرةً لتفسير الآية: 1 - 2 - 3

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

المزمور المئة والْحَادِي والثلاثون

الاتضاع والجهاد والرجاء

ترنيمة المصاعد . لداود

"يا رب لم يرتفع قلبى ولم تستعل عيناى .." (ع1)

 

مقدمة:

1. كاتبه: داود النبي كما يذكر عنوان المزمور.

2. متى كتب ؟

هناك رأيان:

أ - عندما نزل داود ليفتقد إخوته الذين يحاربون الفلسطينيين، فوبخه أخوه الأكبر أليآب متهمًا إياه بالكبرياء، فكتب هذا المزمور، معلنًا اتضاعه أمام الله (1 صم17: 28).

ب- كتبه داود عندما اتهمه عبيد شاول بأنه ينبغى الاستيلاء على الملك عندما كان قائدًا حربيًا، أو من أشجع القادة عند شاول؛ ليعلن عدم سعيه لهذا الملك، رغم أن صموئيل النبي كان قد مسحه ملكًا منذ سنوات.

ج - عندما احتقرت ميكال زوجها داود لرقصه أمام تابوت عهد الله، فأعلن أنه يتصاغر أكثر من هذا أمام الرب (2 صم6: 22).

3. يناسب هذا المزمور كل من يهرب من مجد العالم، ويتضع ويترجى الله.

4. لعل هذا المزمور نبوة عن مشاعر المسبيين في بابل، أو الراجعين من السبي في اتضاع أمام الله، ويترجونه أن يساعدهم في بناء الهيكل وقبول عبادتهم.

5. هذا المزمور يظهر مشاعر الإنسان الروحي المؤمن بالله، فيتضع، ويظهر خطية الشيطان المتكبر الذي سقط لكبريائه، ومحاولته أن يرفع كرسيه ومكانته مثل الله (حز28: 16-17). وهكذا أيضًا يوبخ كبرياء الإنسان الأول آدم وحواء اللذين حاولا أن يصيرا مثل الله (تك3: 5).

6. يصلى هذا المزمور على الدرجة الثانية عشر في طريق الصعود إلى الهيكل. ويلاحظ أنه عند الارتفاع والاقتراب إلى الهيكل يصلى هذا المزمور الذي يدعو إلى الاتضاع. وكلما ارتفعنا نحو الله نحتاج لاتضاع أكبر، ويزداد الجهاد الروحي والرجاء في الرب.

7. يوجد هذا المزمور بالأجبية في صلاة النوم؛ ليعلن فيها الإنسان اتضاعه أمام الله مترجيًا خلاصه بعد انقضاء يوم كامل؛ ليسامحه عن كل خطاياه، ويعطيه نومًا هادئًا ومكانًا في الأبدية.

 

(1) الاتضاع (ع1)

(2) الجهاد الروحي (ع2)

(3) الرجاء (ع3)

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

(1) الاتضاع (ع1)

 

ع1: يَا رَبُّ، لَمْ يَرْتَفِعْ قَلْبِي، وَلَمْ تَسْتَعْلِ عَيْنَايَ، وَلَمْ أَسْلُكْ فِي الْعَظَائِمِ، وَلاَ فِي عَجَائِبَ فَوْقِي.

لم تستعل: لم تتعالَ ولم تتكبر.

  1. يعلن داود أنه لم يسقط في الكبرياء بمشاعره، فلم ينظر بعينه إلى الملك، أو مكانة أسمى مما هو فيها؛ ليس ليتفاخر باتضاعه، ولكن ليشكر الله على نعمة الاتضاع التي وهبها له، سواء في قلبه، أو في نظرة عينيه، أو في سلوكه وأعماله.

  2. لم يشته داود أن يجلس على العرش ويزيح شاول، مع أنه كان ممسوحًا بيد صموئيل، وكان الله قد رفض شاول لأجل خطاياه، ولكنه ظل خاضعًا لشاول. بل عندما سقط شاول تحت يد داود مرتين، قال كيف أمد يدى إلى مسيح الرب (1 صم 24: 6) ولم يقتله، مع أن شاول كان يحاول مرات كثيرة قتل داود.

  3. يشبه داود هنا المسيح في اتضاعه، فداود يرمز للمسيح، ولذا فقد طوب الله داود عندما قال عنه "وجدت داود بن يسى رجلًا حسب قلبى" (أع13: 22).

وستجد تفاسير أخرى هنا في موقع الأنبا تكلا هيمانوت لمؤلفين آخرين.

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

(2) الجهاد الروحي (ع2):

بَلْ هَدَّأْتُ وَسَكَّتُّ نَفْسِي كَفَطِيمٍ نَحْوَ أُمِّهِ. نَفْسِي نَحْوِي كَفَطِيمٍ

  1. كان داود يعيش ببساطة كراعى غنم، ولكن قوة الله كانت تسانده، فقتل الأسد والدب. ومسحه صموئيل ملكًا، وقتل جليات الجبار، وكان قائدًا حربيًا ناجحًا، وقتل الكثير من الفلسطينيين، ولكنه حُرم من كل راحة، إذ حاول شاول قتله مرات كثيرة واستمر مدة طويلة، وقبل هذا الفطام من كل راحة. فهو قد فُطم من المُلك وأيضًا من الراحة الطبيعية والاستقرار الذي يناله كل إنسان يسكن في بيته مع زوجته وأولاده. قبل هذا بشكر، فمتعه الله الذي رفع عينيه نحوه وأعطاه الاستقرار الداخلي.

  2. "نفسى نحوى كفطيم" لم يحدث هذا الهدوء وقبول نفسه الفطام بسهولة، بل جاهد داود كثيرًا، وكانت نفسه تتعب من صعوبة هذا الفطام. فكان يهدئها بالرجوع إلى الله والرجاء فيه؛ لأن تهديدات، وشر شاول كان مثيرًا جدًا، ورغم شعور شاول بخطئه عندما كان يسامحه داود، يعود ثانية ويحاول قتله، ولكن داود قاوم رغباته في الانتقام أو في اشتهاء الملك، وقبل الخضوع باتضاع شديد أمام شاول، بل شبه نفسه بكلب ميت وبرغوث واحد، وهنا يشبه نفسه بطفل صغير جدًا تم فطامه عن اللبن؛ ليعلن مدى معاناته.

  3. لقد حقق داود في نفسه ما قاله المسيح بعد سنوات طويلة، عندما أعلن أنه "إن لم ترجعوا وتصيروا مثل الأولاد فلن تدخلوا ملكوت السموات" (مت18: 3).

  4. حرمان الفطيم من اللبن يؤهله أن يأكل طعام البالغين، كما أن بني إسرائيل في برية سيناء شعروا بحرمانهم من اللحم والبصل والكرات، ولكن كان هذا ضروريًا ليتمتعوا بخيرات أرض كنعان. وداود إن كان قد حرم من الراحة الجسدية، وعانى متاعب كثيرة من شاول وأبشالوم، ولكنه تمتع بعشرة الله، وصار قلبه مثل الله.

St-Takla.org                     Divider of Saint TaklaHaymanot's website فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

(3) الرجاء (ع3):

بَلْ هَدَّأْتُ وَسَكَّتُّ نَفْسِي كَفَطِيمٍ نَحْوَ أُمِّهِ. نَفْسِي نَحْوِي كَفَطِيمٍ

  1. إسرائيل هو شعب الله الذي تميز بوجود الله في وسطه، لذلك كان يرجوه في كل خطواته، وينبغى أن يظل هكذا إلى أن يصل إلى الملكوت (إلى الدهر).

  2. هكذا أيضًا عاش داود مؤمنًا بالله، ويترجاه من الآن، أي على الأرض، وحتى نهاية عمره إلى أن يصل إلى الملكوت، وهذا يعلمنا أن نضع رجاءنا في الله طوال حياتنا.

قدر ما تتضع أمام الله، وتتنازل عن شهوات العالم، يزداد رجاؤك في الله. والرجاء يسندك أيضًا في جهادك، ويثبتك في الاتضاع، فتتمتع كل أيامك بعشرة الله.

St-Takla.org                     Divider فاصل - موقع الأنبا تكلاهيمانوت

← تفاسير أصحاحات مزامير: مقدمة | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 | 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 | 29 | 30 | 31 | 32 | 33 | 34 | 35 | 36 | 37 | 38 | 39 | 40 | 41 | 42 | 43 | 44 | 45 | 46 | 47 | 48 | 49 | 50 | 51 | 52 | 53 | 54 | 55 | 56 | 57 | 58 | 59 | 60 | 61 | 62 | 63 | 64 | 65 | 66 | 67 | 68 | 69 | 70 | 71 | 72 | 73 | 74 | 75 | 76 | 77 | 78 | 79 | 80 | 81 | 82 | 83 | 84 | 85 | 86 | 87 | 88 | 89 | 90 | 91 | 92 | 93 | 94 | 95 | 96 | 97 | 98 | 99 | 100 | 101 | 102 | 103 | 104 | 105 | 106 | 107 | 108 | 109 | 110 | 111 | 112 | 113 | 114 | 115 | 116 | 117 | 118 | 119 | 120 | 121 | 122 | 123 | 124 | 125 | 126 | 127 | 128 | 129 | 130 | 131 | 132 | 133 | 134 | 135 | 136 | 137 | 138 | 139 | 140 | 141 | 142 | 143 | 144 | 145 | 146 | 147 | 148 | 149 | 150 | 151

الكتاب المقدس المسموع: استمع لهذا الأصحاح


© st-takla.org موقع الأنبا تكلا هيمانوت: بوابة عامة عن عقيدة الكنيسة القبطية الأرثوذكسية، مصر / إيميل:

الكتاب المقدس: بحث، تفاسير | القراءات اليومية | الأجبية | أسئلة | طقس | عقيدة | تاريخ | كتب | شخصيات | كنائس | أديرة | كلمات ترانيم | ميديا | صور | مواقع | اتصل بنا

https://st-takla.org/bible/commentary/ar/ot/church-encyclopedia/psalms/chapter-131.html