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تفسير الكتاب المقدس - العهد القديم - الموسوعة الكنسية لتفسير العهد القديم: كنيسة مارمرقس بمصر الجديدة

مزمور 119 (118 في الأجبية) - قطعة ت - تفسير سفر المزامير

 

* تأملات في كتاب المزامير ل داؤود (مزامير داوود):
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القطعة الثانية والعشرون (ت)

طلب الخلاص (ع 169-176):

 

الهدف:

السلام والفرح الذي تذوقه داود دفعه إلى الصلاة، معتمدًا على وعد الله الذي يريد أن يقرب أولاده إليه. فطلب أن يكون أمام الله ويسبحه ويغني له، ويطلب خلاصه والحياة معه، ولا يتركه يضل بسبب خطاياه لأنه يحب وصاياه.

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ع169، 170: لِيَبْلُغْ صُرَاخِي إِلَيْكَ يَا رَبُّ. حَسَبَ كَلاَمِكَ فَهِّمْنِي. لِتَدْخُلْ طِلْبَتِي إِلَى حَضْرَتِكَ. كَكَلِمَتِكَ نَجِّنِي.

  1. في هذه القطعة الأخيرة من المزمور يقترب داود من الله؛ لأنه أحبه، وأحب وصاياه جدًا. ولكن عندما اقترب شعر بعدم استحقاقه لهذا الاقتراب، ولكنه أحب الله، فتوسل إليه أن يبلغ ويصل صراخه إليه، وتدخل أيضًا طلباته أمامه، إذ شعر بضعفه وخطاياه التي تعطله عن المثول في حضرة الله.

  2. طلب من الله أن يفهمه كيف يقف أمامه ويهبه الحياة الجديدة فيه، وينجيه من خطاياه، ومن كل شيء محيط به؛ لأنه في سرور عظيم لوجوده في حضرة الله، ولا يريد أن يتركه أبدًا.

 

ع171، 172: تُنَبِّعُ شَفَتَايَ تَسْبِيحًا إِذَا عَلَّمْتَنِي فَرَائِضَكَ. يُغَنِّي لِسَانِي بِأَقْوَالِكَ، لأَنَّ كُلَّ وَصَايَاكَ عَدْلٌ.

  1. عندما وجد داود نفسه قريبًا من الله، وفي حضرته فاضت شفتاه بتسبيح الله كنبع خرجت منه مياه كثيرة. ولأن الله علمه فرائضه، وعبادته التي اختبر فيها عشرة الله، فازدادت تسابيحه وأغانيه الروحية مبتهجًا بحضرة الله.

  2. إن داود في فرح بسبب عدل الله الذي أنعم عليه بالوجود معه، وعوضه عن الضيقات المحيطة به بتمتع لا يُعَبَّر عنه.

وستجد تفاسير أخرى هنا في موقع الأنبا تكلا هيمانوت لمؤلفين آخرين.

 

St-Takla.org Image: "I have gone astray like a lost sheep; seek Your servant, for I do not forget Your commandments" (Psalm 119: 176) - by Charles Joseph Staniland. صورة في موقع الأنبا تكلا: الخروف الضال: "ضللت، كشاة ضالة. اطلب عبدك، لأني لم أنس وصاياك" (مزمور 119: 176) - للفنان تشارلز جوزيف ستانيلاند.

St-Takla.org Image: "I have gone astray like a lost sheep; seek Your servant, for I do not forget Your commandments" (Psalm 119: 176) - by Charles Joseph Staniland.

صورة في موقع الأنبا تكلا: الخروف الضال: "ضللت، كشاة ضالة. اطلب عبدك، لأني لم أنس وصاياك" (مزمور 119: 176) - للفنان تشارلز جوزيف ستانيلاند.

ع173، 174: لِتَكُنْ يَدُكَ لِمَعُونَتِي، لأَنَّنِي اخْتَرْتُ وَصَايَاكَ. اشْتَقْتُ إِلَى خَلاَصِكَ يَا رَبُّ، وَشَرِيعَتُكَ هِيَ لَذَّتِي.

  1. اختار داود شريعة الله ليحيا بها، وهذا الاختيار عكس اختيار أعدائه، الذين اختاروا الشر ولذا يطلب معونة الله لينفذ وصاياه، ويثبت فيها مهما كانت مقاومة الأعداء. وعندما اختبر وصايا الله ومعونته اشتاق أن يخلص من خطاياه، وحروب إبليس، ومقاومة الأعداء؛ ليتفرغ لكلمة الله، ويتلذذ بالتأمل فيها. فهذه هي الحياة الحقيقية لداود في الوجود مع الله، والتمتع بوصاياه.

  2. إن يد الله التي يطلبها داود لمعونته هي نبوة عن المسيح الفادي، وهو مشتاق لخلاصه الذي يتممه على الصليب في ملء الزمان، فيهبه هو وكل المؤمنين التلذذ بالوجود في الفردوس معه. لقد انجذب قلب داود إلى الله، فعبر الزمان ورأى المسيح، بل ارتفع إلى الفردوس والملكوت.

 

ع175: لِتَحْيَ نَفْسِي وَتُسَبِّحَكَ، وَأَحْكَامُكَ لِتُعِنِّي.

تعلق قلب داود بالله، وتسبيح اسمه القدوس، فطلب منه أن يهبه الحياة الروحية، أي الوجود الدائم معه؛ ليستمر في تسبيحه نهارًا، وليلًا. وطلب أيضًا من الله أن يعينه بأحكامه ووصاياه؛ حتى لا يسقط في خطية، أو هم من هذا العالم، أو ينشغل بأي شكل عن الله؛ لأن الحياة أصبحت في نظر داود هي الوجود في صلاة وتسبيح دائم معه، بل هو مشتاق إلى التسبيح الدائم في ملكوت السموات.

 

ع176: ضَلَلْتُ، كَشَاةٍ ضَالَّةٍ. اطْلُبْ عَبْدَكَ، لأَنِّي لَمْ أَنْسَ وَصَايَاكَ.

شاة: بهيمة ولكن المقصود هنا خروف.

بعد أن ارتفع داود جدًا، وتمتع لم ينسَ ضعفه، وعدم استحقاقه، وتعرضه للسقوط في أية خطية، وتذكر خطاياه السابقة، فنادى الله معينه وقال له لقد ضللت بخطاياي مثل شاة، وليس لي معين سواك يا رب، ولا أستطيع أن أعود إليك لضعفي، فاطلبني أنت وأنقذني، وليس لي دالة أمامك إلا أني أحببت وصاياك، وأرددها، وأسعى لأحيا بها. فأنا رغم ضعفي وخطاياي أحبك، وأحب وصاياك، وأتمنى أن أظل في حضرتك أسبحك كل أيام حياتي وإلى الأبد.

ما أجمل الوجود مع الله، فلا تحرم نفسك من التأمل والتسبيح كل يوم. إعطي وقتًا كافيًا للصلاة؛ حتى تتذوق حلاوة عشرة الله، وترتفع إلى السماء وأنت على الأرض، ويتعلق قلبك بالأبدية فتحيا لها.

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